भुवनेश्वर के स्टेनलेस स्टील बस शेल्टर चक्रवात फनी के असर से रहे अप्रभावित

पेड़ों और होर्डिंग-साइनबोर्ड के गिरने के बावजूद करीब 200 स्टेनलेस स्टील के बीक्यूएस में कोई क्षति नहीं

भुवनेश्वर, 16 मई 2019: फनी चक्रवात ओडीशा में पिछले दो दशक का सबसे बड़ा चक्रवात है। सरकारी अनुमान के मुताबिक फनी आपदा के चलते राज्य को करीब12,000 करोड़ रूपये का नुकसान हुआ है। दुर्भाग्य से इस चक्रवात के कारण जान-माल को भारी हानि पहुंची है। फनी के इस भयावह प्रकोप के बावजूद भुवनेश्वर में हाल ही में स्थापित लगभग 200 स्टेनलेस स्टील बस क्यू शेल्टर (बीक्यूएस) अप्रभावित खड़े हैं। 240 किलोमीटर प्रति घंटा की ख़तरनाक रफ़्तार से चल रही हवा में बीक्यूएस का ढांचा साबूत खड़ा रहा जिससे विकट मौसम में स्टेनलेस स्टील की मज़बूती ज़ाहिर होती है। ये बीक्यूएस जिंदल स्टेनलेस ने एक सरकारी परियोजना के तहत इस साल फरवरी में स्थापित किए थे। चक्रवात के बाद इन स्टेनलेस स्टील बीक्यूएस में केवल दूसरी धातु से बने मल्टीवाल रूफ शीट, सिटी मैप डोर और ट्यूब लाइट को बदलने की आवश्यकता है। जिंदल स्टेनलेस ने इनकी देख-रेख का काम शुरू कर दिया है।

प्राकृतिक आपदा प्रभावित और लवणयुक्त (सेलाइन) वातावरण में सामाजिक बुनियादी ढांचों के लिए स्टेनलेस स्टील की भूमिका को उजागर करते हुए जिंदल स्टेनलेस के प्रबंध निदेशकश्री अभ्युदय जिंदल ने कहा, ओडीशा एक तटीय राज्य है जिस पर अक्सर चक्रवात का ख़तरा मंडराता रहता है। इसलिए ज़रूरी है कि शहर को सुरक्षित और रख-रखाव मुक्त बनाए रखने के लिए एक मज़बूत और हर मौसम को झेल पाने वाला पदार्थ चुना जाए। स्थानीय प्रशासन ने बस क्यू शेल्टर जैसे नए बुनियादी ढांचे के लिए स्टेनलेस स्टील का चुनाव किया था। अप्रभावित खड़े स्टेनलेस स्टील के बस शेल्टरों ने इस धातु की ताकत और बाहरी दबाव के प्रति सहशीलता की शक्ति को उजागर किया है। मौजूदा हालात के मद्देनज़र हम प्रशासन से आग्रह करेंगे कि भविष्य के सभी परियोजनाओं में स्टेनलेस स्टील को अपनाया जाए।

भारत का तटीय क्षेत्र 7,500 किलोमीटर के विशाल दायरे में फैला है। इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचों में क्षति कम करने के लिए और उन्हें मज़बूत बनाने के लिए स्टेनलेस स्टील का उपयोग ज़रूरी है। ये मुख्य तौर पर इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए है। इसके अलावा स्टेनलेस स्टील तटीय क्षेत्र में लवणयुक्त वातावरण के कारण होने वाले तेज़ क्षरण के प्रति भी सहनशील है। स्टेनलेस स्टील की विभिन्न श्रेणियों और विशिष्टताओं के उपयुक्त और रणनीतिक चुनाव से इस धातु का सौन्दर्य लगभग एक सदी तक बरक़रार रह सकता है। क्षरण को रोकने की इसकी उच्च क्षमता के कारण स्टेनलेस स्टील का उपयोग बिना पेंट किये भी किया जा सकता है और इसमें सालों-साल रख-रखाव की ज़रुरत बहुत कम होती है। इससे अन्य धातुओं में होने वाली मरम्मत की ऊंची लागत बचती है। इसके अलावा ढांचागत जीवन कार्बन स्टील या अन्य धातुओं के मुकाबले तीन से चार गुना बढ़ जाता है। इस तरह स्टेनलेस स्टील की जीवन चक्र लागत अन्य वैकल्पिक धातुओं के मुकाबले सबसे कम है।

पर्यावरण के लिहाज़ से स्टेनलेस स्टील एक ‘हरित धातु’ है जो सतत और टिकाऊ बुनियादी ढांचा समाधान प्रदान करता है। इसलिए यह आवश्यक है कि भारत के तटीय शहरों के अधिकतम बुनियादी संरचनाओं में स्टेनलेस स्टील को अपनाया जाए।

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